विश्वास की एक दीवार बनाना तुम
तब ...
जब हालत तुम्हारे काबू न हो
जब सारी कायनात तुम्हारे खिलाफ हो
मुश्किलों का पहाड़ मानो चुन चुन कर खुशियां दफना रहा हो
तब ....
विश्वास की एक दीवार बनाना तुम
लेहरो में जैसे तूफ़ान उठ रहा हो
कश्ती को तुम्हरी वो निसतेनाबूद कर रहा हो
जब अपने भी साथ छोड़ गए हो
जान भी अनजान हो गये हो
तब ....
तब .....विश्वास की एक दीवार बनाना तुम
तब .....विश्वास की एक दीवार बनाना तुम
खुद पर विश्वास बरक़रार रखना तुम
हर हालात से ये झूझ लेंगी
हर तूफ़ान से ये निपट लेंगी
हर हालातो का रुक ये मोड़ देंगी
मुश्किलों के पहाड़ को ये तोड़ देंगी
लेकिन तब ....
जब विश्वास की एक दीवार बनोंगे तुम

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